विश्व पर्यावरण दिवस – हमारी धरती, अल्लाह की अमानत
आज धरती को ख़तरा क्यों है?
<p>विश्व पर्यावरण दिवस क्या है?हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। 1972 में संयुक्त राष्ट्र ने इसकी शुरुआत की थी। मकसद है – लोगों को बताना कि हमारी धरती, हवा, पानी और पेड़-पौधे अल्लाह की नेमत हैं, इन्हें संभालकर रखना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।</p>
<p>2026 का थीम है: "प्लास्टिक प्रदूषण को हराओ"।</p>
<p>हमारे प्यारे धर्म इस्लाम में धरती और पूरी कायनात को अल्लाह की अमानत बताया गया है। कुरआन और हदीस में कई जगह पर्यावरण की हिफाज़त का हुक्म दिया गया है:</p>
<p>इंसान धरती पर अल्लाह का ख़लीफ़ा हैअल्लाह कुरआन में फ़रमाता है: "वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में ख़लीफ़ा बनाया।"मतलब: हमें धरती का मालिक नहीं, बल्कि देखभाल करने वाला बनाया गया है। जैसे कोई अमानत संभालते हैं, वैसे ही धरती को संभालना है।</p>
<p>फसाद फैलाने से मना किया गया है"और ज़मीन में सुधार के बाद फसाद न फैलाओ।"मतलब: पेड़ काटना, पानी गंदा करना, हवा ख़राब करना – ये सब ज़मीन में फसाद फैलाना है, जिससे अल्लाह ने मना किया है।</p>
<p>पेड़ लगाना सदक़ा हैनबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: "अगर क़यामत आ रही हो और तुम्हारे हाथ में पौधा हो, तो उसे लगा दो।"और फ़रमाया: "जो मुसलमान पेड़ लगाता है, उससे जो इंसान, जानवर या परिंदा खाता है, वो उसके लिए सदक़ा है।"</p>
<p>पानी को बर्बाद न करोनबी ﷺ एक सहाबी को वुज़ू करते देखा। आपने फ़रमाया: "यह इसराफ़ क्यों? उन्होंने कहा: क्या वुज़ू में भी इसराफ़ है? आप ﷺ ने फ़रमाया: "हां, चाहे तुम बहती नहर के किनारे ही क्यों न हो।"मतलब: पानी अल्लाह की बड़ी नेमत है। उसे ज़रूरत से ज़्यादा बहाना गुनाह है।</p>
<p>जानवरों पर रहम करोनबी ﷺ ने फ़रमाया कि एक औरत को सिर्फ इसलिए अज़ाब हुआ क्योंकि उसने बिल्ली को बांध कर रखा, न खाना दिया न आज़ाद किया।मतलब: जानवरों, परिंदों का भी हम पर हक़ है। उन्हें तकलीफ़ देना गुनाह है।</p>
<p>पेड़ों की कटाई: ऑक्सीजन कम हो रही है, गर्मी बढ़ रही है।</p>
<p>प्लास्टिक: न गलता है न सड़ता है। नदी-नालों में फंसकर मछली और जानवर मर रहे हैं।</p>
<p>हवा-पानी का गंदा होना: गाड़ियों और फैक्ट्री का धुआं, नदियों में कचरा डालना – इससे बीमारियां बढ़ रही हैं।</p>
<p>हम क्या कर सकते हैं?</p>
<p>प्लास्टिक कम करें: बाज़ार थैला लेकर जाएं। यह इसराफ़ रोकना है, जो अल्लाह को पसंद है।</p>
<p>पेड़ लगाएं: घर, मदरसे या मस्जिद के पास पेड़ लगाएं। यह सदक़ा-ए-जारिया है, यानी मरने के बाद भी सवाब मिलता रहेगा।</p>
<p>पानी बचाएं: नल खुला न छोड़ें। वुज़ू में भी कम पानी इस्तेमाल करें। यह सुन्नत है।</p>
<p>साफ़-सफ़ाई रखें: नबी ﷺ ने फ़रमाया: "सफ़ाई ईमान का हिस्सा है।" अपने घर-गली-मोहल्ले को साफ़ रखें।</p>
<p>ज़रूरत भर ख़रीदें: खाना, कपड़ा या कोई चीज़ बर्बाद न करें। अल्लाह फ़रमाता है: "बेशक फ़ुज़ूलख़र्ची करने वाले शैतान के भाई हैं।"</p>
<p>आख़िरी बात !यह धरती अल्लाह ने हमारे लिए बनाई है, लेकिन यह सिर्फ़ हमारे इस्तेमाल के लिए नहीं है। आने वाली नस्लों का भी इस पर हक़ है। क़यामत के दिन अल्लाह हमसे पूछेगा कि उसकी दी हुई अमानत के साथ हमने क्या किया।</p>
<p>विश्व पर्यावरण दिवस हमें यही याद दिलाता है कि हर दिन अल्लाह की इस नेमत की हिफाज़त करें।</p>
<p>"छोटा-छोटा कदम उठाएं, धरती को महफ़ूज़ बनाएं।"</p>
<p>लेख: मोहम्मद शोऐब रज़ा निजामी फैज़ी</p>
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