उठो कवीराज अब आंखें खोलो
📅 15-09-2024 02:33 PM
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कविता
<p>उठो कवीराज अब आंखें खोलो,,शिमला की मस्जिद, वक्फ बोर्ड बिल पर कुछ तो बोलो…</p>
<p>खोली थी जो तुम्हारे आका ने जो मुहब्बत की दुकान,,देखो हिमाचल में बिक रहा उसमें नफरत का सामान…</p>
<p>तुम तो चले थे भारत जोड़ने,,देखो तुम्हारे लोग लगे हैं शिमला में मस्जिद तोड़ने…</p>
<p>कहां गये तुम्हारे आका, कोई कुछ क्यों नहीं बोलता,,हिमाचल, वक्फ बोर्ड बिल, माबलिंचिंग पर क्यों अपना मुंह नहीं खोलता…</p>
<p>लगता है लगे हैं तुम्हारे आका, अपने पिता का राजधर्म निभाने,,तभी तो लगे हैं तुम्हारे लोग, शिमला में बाबरी दोहराने…</p>
<p>तुम तो करते थे नफरत तोड़ने, देश जोड़ने की बात,,बोलो अब कहा गए तुम्हारे वो जज़्बात…!</p>
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