तंज़ीम फारग़ीन -ए- अमजदिया ने की हिजाब फैसले की निंदा
<p>तंज़ीम फारग़ीन-ए- अमजदिया 2010 के उलेमा ने हिजाब मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और निर्णय को खेदजनक बताया कि यह पूरी तरह से इस्लाम के खिलाफ है और यह इस्लामी शिक्षाओं और शरयी नियमों में हस्तक्षेप है जो हमें स्वीकार्य नहीं है . ऐसे में हमें कानूनी विशेषज्ञों और बड़ों के प्रयासों का इंतजार है जो इस मामले में कोर्ट का दरवाजा जरूर खटखटाएंगे. क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया और फैसले पर खामोश रहे तो इसके कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं, खासकर मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर. फैसला सुनाने से पहले सरकार को यह विचार करना चाहिए कि सभी धर्मों के छात्रों के लिए शिक्षण संस्थानों में उनके धार्मिक प्रतीकों के साथ अध्ययन करने की प्रथा रही है, लेकिन हमेशा की तरह, मुसलमानों को अभी भी निशाना बनाया जा रहा है।इस संगठन के एक युवा सक्रिय धार्मिक विद्वान हज़रत मौलाना आसिफ जमील अमजदी गोंडवी ने अपने बयान में कहा कि निर्णय आने की देरी थी सो हमने कर्नाटक उच्च न्यायालय को भी देखा लिया। मुस्लिम छात्र-छात्राएं नाराज न हों। धैर्य रखें, अपनी परीक्षा ऑनलाइन लें यदि संभव हो तो ,यह बहुत महत्वपूर्ण है। अदालत के इस फैसले के आधार पर बदमाशों के लिए समाज में अशांति फैलाना संभव है, इसलिए मुस्लिम छात्राओं को बहुत समझदारी से काम लेने की जरूरत है, ऐसे में कभी भी भावुक न हों.</p>
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